Monday, May 11, 2009

सरमाया


वो मेरे घर आया है ।
बहुत बड़ा सरमाया है ॥

मैनें कोई बात न पूछी
वो फिर क्यों शरमाया है ॥

मौसम बीत गया तो क्या, वो
अपना मौसम लाया है ॥

सूखा फूल किताबों से उठ
आँखों में मुस्काया है ॥

कल को सच हो जायेगा
आज जो सपना आया है ॥

२ अप्रेल २००५

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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन ।
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2 comments:

SWAPN said...

behtareen rachna. wah. badhai sweekaren.

Udan Tashtari said...

एक सकारात्मक उत्साही सोच:

सूखा फूल किताबों से उठ
आँखों में मुस्काया है ॥

कल को सच हो जायेगा
आज जो सपना आया है ॥


बहुत सुन्दर. बधाई.