Monday, October 27, 2008

छोटा था आकाश बहुत


आँधी, वर्षा, तूफाँ सब कुछ झेल गए हँसते-हँसते
शायद उनके वादों पर था, हमको ही विश्वास बहुत|

प्रथम किरण से गोधूली तक कहाँ-कहाँ उड़ते फिरते
परवाज़ें थीं बहुत बड़ी और, छोटा था आकाश बहुत|

रुपया, पैसा, कपड़ा ,लत्ता, गाड़ी, बंगला सब तो है
क्या बतलाएँ किसकी ख़ातिर, हम हैं आज उदास बहुत|

साक़ी, सागर, मीना सब थे उनकी महफ़िल में लेकिन
हमने अपना खून पी लिया, क्या करते थी प्यास बहुत|

५-जून-२०००

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1 comment:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अच्छे शेर हैं, बधाई!

दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ...
दीवाली आप और आप के परिवार के लिए सर्वांग समृद्धि लाए।