Tuesday, March 1, 2011

आरे, बेटा सुन

(सन्दर्भ: नया बजट-२०११-२०१२, साबुन, टीवी, फ्रिज सस्ते)

आरे बेटा सुन,
सस्ता हो गया अब साबुन ।

खूब लगा ले, दाग मिटा ले,
धुल जाएँगे करतब काले,
तेरी उजली छवि के कारण
शायद जनता फिर ले चुन ।

आरे बेटा सुन
सस्ता हो गया अब साबुन ।

साबुन मल के, उजला बन के,
सस्ता टी.वी. देखो तन के,
खाली फ्रिज को देख-देख के
खाने की खातिर सिर धुन ।

आरे बेटा सुन
सस्ता हो गया अब साबुन ।

यह विकास की चादर मैली,
जनता झोली, नेता थैली,
सिर औ’ पैर सभी के ढक दे
ऐसी कोई चादर बुन ।

आरे बेटा सुन
सस्ता हो गया अब साबुन ।

२८-२-२०११

पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)


(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Joshi Kavi

नया बजट (२०११-२०१२)



(नए बजट में मोबाइल, टी.वी. सस्ते)

रोटी-पानी ना मिलें, तो दुःख की क्या बात ।
मोबाइल सस्ता हुआ, कर जी भरकर बात ।
कर जी भरकर बात, बात से काम चला ले ।
बातों की ही खाते हैं सब ऊपर वाले ।
कह जोशी कवि नहीं भरा हो मन जो अब भी ।
देखो जी भर अब सस्ता एल.सी.डी. टी.वी. ।

२८-२-२०११


पोस्ट पसंद आई तो मित्र बनिए (क्लिक करें)

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Joshi Kavi