Wednesday, August 25, 2010

जूते और कामन वेल्थ




१. नया उपयोग
(हरियाणा के मुख्यमंत्री हुड्डा पर शक्ति सिंह नाम के एक व्यक्ति ने जूता फेंका -२२-८-२०१०)

बदल गया है वक्त और बदल गए सब यूज़ |
पहना जाता कभी अब फेंका जाता शूज़ |
फेंका जाता शूज़, इसे प्रक्षेपित करता |
वह चर्चित होता पल भर में हीरो बनता |
कह जोशी कविराय जिसे जूता लग जाए |
लगते ही वह हुड्डा जी से बुश बन जाए |

२.
(१५ अगस्त २०१० के कार्यक्रम में श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला पर जूता फेंका )

बुश से लेकर उमर तक फिंकता जूता देख |
दुनिया में संवाद की भाषा नूतन, नेक |
भाषा नूतन, नेक; चिदंबरम औ' जरदारी |
बड़े-बड़ों की छवि जूते से गई निखारी |
कह जोशी कविराय बढ़ गया रुतबा उसका |
जिस पर भी जनता ने खुश हो फेंका जूता |


३. मोम के स्वामी
(भक्तों ने सी.डी. स्वामी नित्यानन्द की मोम की मूर्ति बनवाकर आश्रम में रखी- एक समाचार, २९-७-२०१०)

बने मोम की मूर्ति स्वामी नित्यानंद |
भक्तों का अंदाज यह आया हमें पसंद |
आया हमें पसंद, जहाँ चाहें रखवाएँ |
पर सुंदरियाँ कभी मूर्ति के पास न जाएँ |
कह जोशी कवि वरना गड़बड़ हो जाएगी |
यौवन की गरमी पाकर के पिघल जाएगी |



४.शुद्ध सोना
(मैं २४ कैरेट सोने के सामान शुद्ध हूँ- कर्णाटक के पर्यटन मंत्री जनार्दन रेड्डी, १९-७-२०१० )

मंत्री इतने शुद्ध ज्यों चौबीस कैरेट स्वर्ण |
फिर भी जाने हो रहा क्यों नेतृत्व विवर्ण |
क्यों नेतृत्व विवर्ण, किस तरह पिंड छुडाए |
सारे चिंतन करें मगर कुछ समझ न आए |
कह जोशी कविराय सभी हो रहे निरुत्तर |
कुर्सी के लालच में पकड़े साँप छछूँदर |


५. कामन वेल्थ
(कामन वेल्थ गेम्स में करोड़ों का घपला, खेल समिति शक के घेरे में, अगस्त २०१० )

सबका ही अधिकार है जब कामन है वेल्थ |
अगर न खाएँ तो भला कैसे सुधरे हेल्थ |
कैसे सुधरे हेल्थ, दौड़ना कूद लगाना |
कैसे संभव अगर नहीं खाएँगे खाना |
जोशी नीति कहे यदि हों दो तबले लाना |
तो उनमें से एक स्वयं के घर पहुँचाना |

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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन ।Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Joshi Kavi

Wednesday, March 31, 2010

योअर नेम इज नोट खान



1.
(राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना के मुम्बई की लोकल ट्रेन में घूमे- ५-२-२०१०)

आप घूमते ट्रेन में मुम्बई में बिंदास ।
मगर पंडितों को नहीं घर जाने की आस ।
घर जाने की आस, खायँ दिल्ली में धक्के ।
जन्म भूमि के ख्वाब देखते हक्के-बक्के ।
कह जोशी कविराय - 'देश सबका' तब मानें ।
जब 'पंडित' निर्भय हो घर जाने की ठानें ।


2. गुंडों का राज

कैसे मानें देश में- 'सारे लोग समान' ।
एक सभी का मुल्क है- 'प्यारा हिंदुस्तान' ।
प्यारा हिंदुस्तान, इसे हम तब सच मानें ।
जब 'पंडित' घर लौटें तो सत्ता को जानें ।
कह जोशी कविराय 'राज' वरना गुंडों का ।
बड़े जनों के बिगड़े अपराधी मुंडों का ।


3. फिल्म और बकरा
(महाराष्ट्र सरकार ने 'माई नेम इज खान' रिलीज करवाने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए- १२-२-२०१०)

अपनी रक्षा कर स्वयं या फिर भज ले राम ।
जनता की सरकार को और बहुत हैं काम ।
और बहुत हैं काम क्रिकेट का मैच खिलाना ।
औ' 'मई नेम इज खान' प्रदर्शित भी करवाना ।
कह जोशी कविराय बता देना बकरे को ।
अपने बल पर झेलना हर खतरे को ।


4. योअर नेम इज नोट खान
(पाक अधिकृत कश्मीर भाग चुके आतंकवादी भाइयों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की योजना- १६-२-२०१०)

'पंडित' रहकर जा सकें हम अपने घर-बार ।
नहीं दूर तक दीखते इसके कुछ आसार ।
इसके कुछ आसार, 'खान' यदि हम बन जाएँ ।
आतंकी होकर भी मोटा पैकेज पाएँ ।
कह जोशी कविराय जो शिखा-सूत्र रखेंगे ।
काश्मीर में वे ही सदा अछूत रहेंगे ।


5. कायर या मक्कार

कश्मीरी आतंकियों का करती सत्कार ।
कायर है सत्ता यहाँ या फिर है मक्कार ।
या फिर है मक्कार, केंद्र से पैकेज आए ।
जिसको नेता, आतंकी मिल-जुल कर खाएँ ।
कह जोशी कविराय दलाली खुल्ला खाता ।
पैकेज देने में इनके घर से क्या जाता ।


6. बढ़िया मौका

भाग गए थे जो कभी वे सब आएँ लौट ।
सबको देंगे नौकरी, बोरी भरकर नोट ।
बोरी भर कर नोट, न कोई केस चलेगा ।
ऐसा बढ़िया मौका बोलो कहाँ मिलेगा ।
कह जोशी कवि बात 'पंडितों' की ना करते ।
घर से गए निकले जाने कहाँ भटकते ।


7.

भारत देगा नौकरी और प्रशिक्षण पाक ।
सीधे पढ़-लिख छानते शेष मुल्क में ख़ाक ।
शेष मुल्क में ख़ाक, धाक, सर्विस जो चाहें ।
उनको यह संकेत शीघ्र हथियार उठाएँ ।
कह जोशी कवि जो राजा को जूता मारे ।
राजा सादर उसको अपना बाप पुकारे ।


8.

'गर भारत में आप हैं शर्मा, गुप्ता, सिंह ।
तो सत्ता के पास में नहीं है एनीथिंग ।
नहीं है एनीथिंग, अल्पसंख्यक को सब कुछ ।
अगर बदल लो धर्म तभी हो पाएगा कुछ ।
कह जोशी कवि बनो मुसलमाँ या ईसाई ।
मिले वजीफा, सीट मज़े से करो पढ़ाई ।

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