1998-12-23
वो यूँ तो चुप रहता है ।
पर कितना कुछ कहता है ॥
उसकी आँखों का आँसू
मेरी आँखों बहता है ।
जिससे मेरा झगड़ा है
दिल में ही तो रहता है ।
पत्थर के सीने में भी
कोई झरना बहता है ।
तुमने सिर्फ़ रोशनी देखी
लेकिन सूरज जलता है ।
२३ दिसम्बर १९९८
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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी | प्रकाशित या प्रकाशनाधीन |
Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Joshi Kavi
पर कितना कुछ कहता है ॥
उसकी आँखों का आँसू
मेरी आँखों बहता है ।
जिससे मेरा झगड़ा है
दिल में ही तो रहता है ।
पत्थर के सीने में भी
कोई झरना बहता है ।
तुमने सिर्फ़ रोशनी देखी
लेकिन सूरज जलता है ।
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