Tuesday, November 4, 2008

पूरी ख़बर है हमको


1996-01-04 


दो चार तिनके लेकर, तूफाँ के सामने हैं
वैसे क़यामातों की, पूरी ख़बर है हमको |

मुख में है राम लेकिन, तीखी छुरी बगल में
ऊंची सियासतों की, पूरी ख़बर है हमको |

हम जैसा जी रहे हैं, वैसाही लिख रहे हैं
ताज़ी रवायतों की, पूरी ख़बर है हमको |

हम ही तो हैं मुहाफिज़, क़ौमी अमानतों के
उनकी खयानतों की, पूरी ख़बर है हमको |

कितना कठिन समय है, यह तुम भी जानते हो
रस्मी इनायतों की, पूरी ख़बर है हमको |

हो कौन किसका दुश्मन, रहबर ही तय करेंगे
ज़ाती अदावतों की, पूरी ख़बर है हमको |

४ जनवरी १९९६

* रवायत - रवैया, रिवाज़ (ways, style, customs, mannerism) | मुहाफिज़ - रक्षक (protector)
खयानत - धोखा | अदावत - दुश्मनी (animosity)

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Monday, November 3, 2008

प्रश्न


बचकर मेरी नज़र से निकले
तो क्यूँ आप इधर से निकले

गाँव समेटा शहर आगये
जाएँ कहाँ शहर से निकले

प्रश्न उठ रहे जब अन्दर से
कैसे हल बाहर से निकले

शाम ढले थककर घर लौटे
कहाँ रुकें जो घर से निकले

वे तो मन में कहीं नहीं थे
जो संकेत ख़बर से निकले

जात पाँत में भटक जायेंगे
'गर मस्जिद -मन्दिर से निकले

२५-५-९५

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